Wednesday, October 12, 2011

आज भी बाकी है...





कल रात का सुरूर, आज भी बाकी है 
वो जो मिट गया था प्यार, आज भी बाकी है 
कागज़ पे लिखना, लिख के मिटा देना 
वो जो ऐसी थी आदत,आज भी बाकी है
है पता किसे ,किसकी इबादत थी सच्ची 
जाने कौन, किसकी ताकत थी कच्ची 
अपनी तो फितरत आवारा, आज भी बाकी है
मर्ज़ी नहीं, साये की अपने साथ होने की 
हो गयी है आदत, यू बारिशों में रोने की 
ग़म को सीने  की चाहत, आज भी बाकी है
कारवां रुकता नहीं, वक़्त भी थमता नहीं
ज़िन्दगी का सफ़र भी ऐसे कहीं रुकता नहीं 
शायद ज़िन्दगी जीने की चाहत,आज भी बाकी है...

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