Thursday, October 13, 2011

वो डायरी....

वो डायरी याद है तुमको, प्यार से जो दी थी 
चौथे पन्ने पे उसके एक कविता लिखी थी 
नाम तुम्हारा लिखा था जो उसमें 
मुस्कुरा के वो फिर, तुमने पढ़ी थी 
रखी थी वो तुमने अपने तकिये  के नीचे 
आई थी खुशबू तुम्हारी जुल्फों की उसमें 
क्या वाकई वो डायरी याद है तुमको ?
याद है जब वापस तुमसे मैनें मांगी थी वो 
तुमनें भी बेगरज़ वापस कर दी थी वो 
वो दिन थे, और आज का लम्हा है शुमार 
खो गयी वो डायरी, खो गया है खुमार....  

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